एक ख्वाहिश थी तुझे पाने की.. हर रोज़ नज़र में लाने की.. डर तो सिर्फ तुझे खोने का था.. मेरी तो ज़िद थी तुझमें मिल जाने की | एक उम्मीद की कड़ी जो तुझे मुझसे जोड़ जाए.. इस आस में कोई भी जी जाए.. मुस्कुरा दे तू जिस पल, वो वहीं थम जाए.. तेरे हर "उफ" को मेरी नज़र लग जाए | :) -दीर्घा :)
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