Skip to main content

Posts

Showing posts from January, 2022

ढोंग

🌼🌼🌼 तुम इतने ज़ख्म खाए हुए हो, रोते हुए को हँसाए हुए हो। ज़रा पूछो एक सवाल खुद से भी कभी, तुम क्यों ढोंग रच कर उन्हें लुभाए हुए हो? उनको खुशी है तुम्हारे खिलखिलाने से, तुम क्यों अपनी पीड़ा उनको दिखाए हुए हो? केवल नज़दीकियाँ ही वो तुमसे चाहते हैं, तुम क्यों अपने असंतुलित मन के लिए उन्हें सताए हुए हो? राह में चलते वक्त इतने मशगूल रहे हो, बहे न पानी न हवा जिस डगर, तुम उनकी ओर उधर भी बहे हो। स्वीकार तुम्हें उनकी उपस्थिति मात्र थी, फिर तुम क्यों हर पहर खुद को उनमें लुटाए हुए हो? रो-रो कर सुजा लिए हैं नयन तुमने, तुम उनके लिए आँखों में काजल सजाए हुए हो। होठों के बीच से झांकती मुस्कुराहट से, तुम लगी हुई बात दबाए हुए हो। तुम जानते नहीं हो क्या कि आंकलन प्रेम का सतयुग से होता आया है? तो तुम क्यों अंध भाव से लगन लगाए हुए हो? ज़रा पूछो एक सवाल खुद से भी कभी, तुम क्यों ढोंग रच कर उन्हें लुभाए हुए हो? **** -Dirgha Pandey :)

मृगतृष्णा

मैं बैठी थी बिस्तर पर अपने। साथ की दीवार पर एक खिड़की थी। खिड़की से वह पेड़ दिख रहा था। वही पेड़ जिस को बचपन में मैंने देखा था। उसकी वही टहनियां वही पत्ते वही फूल वही फल। मुझे कुछ बदला हुआ क्यों नहीं लगा? 27 साल हो गए हैं। वह पेड़ नहीं बदला, आखिर क्यों? मेरे अंदर इतने विकार क्यों आगए? मेरे स्वभाव में इतने परिवर्तन क्यों? मैं क्यों बदल गई, मैं भी तो एक पेड़ जैसी जीव ही हूँ। फूलों जैसे मेरे भी हर किसी के संग कई रंग हैं, पत्तों जैसे मैं भी कभी हरी-हरी कभी झड़ी-झड़ी हूँ। मेरे पैर भी टहनियों की तरह कभी-कभी डगमगा जाते हैं। फिर भी, ऐसा क्यों हुआ? काफी गहन मनन करने के बाद मुझे यह एहसास हुआ कि कुछ भी पहले जैसा नहीं है। ना तुम, ना मैं, ना वह पेड़। उसके फल, फूल, पत्तियां एवं टहनियां मौसम के साथ और हवा-पानी के कारणवश उसे छोड़ के चले गए। किंतु उसने निरंतर उनकी दोबारा उत्पत्ति को नहीं रोका। इसका एकमात्र कारण यही था कि उसकी जड़ें मजबूत थी। जब वह मिट्टी को तोड़ सूर्य की ओर अग्रसर हो रहा था उसी क्षण से उसकी वही जड़ें थी, जिन्होंने कभी उसका विरोधाभास नहीं किया। या यूं कहूं उस वृक्ष ने ही उन्हें द...

Butterflies🦋🦋🦋

🦋 That excitement of meeting him once a day or so, when it rains Have I started to feel butterflies in my stomach again? I walk out of the door to meet my livelihood I stumble and fall into the trap of my childhood. You make me feel like a child in my pre-teens when I had to study hard to have a pie and chocolaty greetings. I've always wondered how the slow motion in the movies works until I commited gaffes and felt silence in abyss. You tickle lyrics within me with a sight of you Music plays in my head when I gaze at you. Are you the ultimate goal I have to achieve? or are you just the pleasure that I have to reel? You click me with your smile & photograph me in your eyes you show wind to me through my hair and perk me up with that care. Maybe I am falling down on a road of flowers where soon I would collapse. maybe I am going down the lane from where there is no comeback. maybe I am ready for the pain yes, I have started feeling butterflies...