Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2023

लालसा सन्यास की. . .

आग   की   जलन   भी   मैं , गर्भ   की   तपन   भी   मैं , मैं   पर्वतों   के   धीर   सी और   बर्फ   में   भी   नीर   सी। मैं  वायु   का   प्रकोप   हूँ , न   दोहा   न   श्लोक   हूँ , जीत   में   नि : शब्दता , हार   में   प्रलोभ   हूँ। कभी   धूमिल   सी , कभी   उजली - उजली , नाट्य   पात्र   बन   नायिका   सी कभी   हितैषी   कभी   बैरी , मैं   हर   पहलू   के   हिस्से   सी। सारांश   में   साहित्य   मैं , संबंध   में   कर्तव्य   भी रेत   में   लिखी   कहानी   हूँ , मैं   मृगतृष्णा   की   रानी   हूँ। आक्षेप   में   भी   फिक्र   सी , कोमल   स्पर्श   के   ज़िक्र   सी प्रेमपूर्ण   ह्रदय   सहित , सन्नाटे   में   कहर   सी सैकड़ों   ध्वनियों ...