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देखो एक दफा मेरी नज़र से..

वो मुस्कुराता है, उसी खूबसूरती से जैसे मानो बूंदे हों एक पत्ते पर वो खिलखिलाता है, उसी नज़ाकत से  जैसे लहरें हों समुंदर पर | आँखें उसकी,मैं अकसर पढ़ लिया करती हूँ छुप छुप कर उसकी तस्वीर से बाते किया करती हूँ कुछ एहसास होंगे उसकी भी ओर से देखो एक दफा मेरी नज़र से | वो लालिमा उसके गालों की जब हँसी लबों को छूती है वो पलकें ठहरी हुई सी किसीके इंतेज़ार में बिछती हैं कहता है वो हर बात दिल से देखो एक दफा मेरी नज़र से | सुनकर उसे मन में एक आहट सी होती है दूरी है लेकिन आवाज़ क्यों करीब सुनाई पड़ती है यूं तो वो कोई नहीं पर फिर भी सब कुछ लगता है सोच में मेरी बस उसका ही चर्चा है मासूम सा है वोै मन से देखो एक दफा मेरी नज़र से | खोया उसने जो जो है, शायद ही लौटा पाऊं मैं उम्मीद यही है उसकी ज़िन्दगी खुशियों से भर जाऊं मैं  अनजान है हर फरेब से हर दिखावट, हर ऐब से कोई कमी न महसूस होगी, देखो एक दफा मेरी नज़र से | देखो एक दफा मेरी नज़र से .. देखो एक दफा मेरी नज़र से .. - Dirgha Pandey