Skip to main content

क्या मालूम तुझे?

कलम उठाई और लफ्ज़ पिरोए
कुछ बिखरे-बिखरे से,
कुछ निखरे-निखरे से
जो बने मिसरा
मेरे काव्यों का,
तुझसे ही तुझ तक
मेरी बेरंग सी उमंगों का,
पर
तू आज भी मुझे
गैर समझता है।

क्या मालूम तुझे?
लिखा है मैंने,
हमारी पहली मुलाक़ात पर
न नोंक-झोंक न टकरार
सिर्फ इज़हार-ए-ख़ुमार पर।
जिया है मैंने,
उन पन्नों को जो
आज भी इतराते हैं,
तेरी हर कही बात पर।

क्या सुने तूने
मेरी चाहत के किस्से?
क्या पता तुझे
मेरे ज़माने में चर्चे ?
क्या कहा तूने
तू मेरा कुछ भी नहीं ?
क्या लगा तुझे
मैं खोई-खोई सी यूं ही रही?

क्या मालूम तुझे?
मेरी हर कहानी की खूबसूरती तू ,
हर कविता की ध्वनि तू ,
हर ग़ज़ल की तपिश तू,
हर आरज़ू की कशिश तू।
पर
तू आज भी मुझे
गैर समझता है।
- Dirgha Pandey

Comments

  1. Good lines ... A ans ...Samajhdaari meri usi din chali gayi thi is dimaag se,,,

    Samajhdaari meri usi din chali gayi thi is dimaag se .......

    Jis din iss pagal dil ne tuje dekha tha ....

    ReplyDelete
  2. There are 3 things i have discovered,realized and felt about life!
    1)If you love TRULY,
    You'd die DAILY !! :)
    2)Life has so much to be with so much to share for! It's indeed the another meaning of Happiness,that one is supposed to Create instead of Finding :)
    3)Any kind of Relationship( promises,friendship,love affair,family relations etc etc) may die,but its story DOES NOT :)

    ReplyDelete
  3. Bahut Umdaa Likha hai ma'am Aapne.

    ReplyDelete
  4. After a long time reading your blog and what I find, a best one .
    Nice for one sided love.

    ReplyDelete

Post a Comment

Scribble what you feel & reach me!

Popular posts from this blog

पुरुष का प्रेम

ये कथा उस पुरुष से प्रेरित है जिसने प्रेम किया भी खूब है और उसे जिया भी खूब है। पुरुष के प्रेम से आत्मविश्वास हो जाए जागृत ये किसी चमत्कार से कम नहीं। उसमें स्त्रीत्व की भावना भी होती है इस में कोई विस्मय या ब्रह्म नहीं। पौरुष वास्तव में है क्या? शौर्य का प्रतीक चाहे हृदय में कितनी ही पीड़ा हो। अगर टूट जाए सब्र का बांध उसका  तो शब्दों के बाण में भी सीमा हो। कठिन मार्ग में भी रखता जो आशा हो और सदैव बताता धैर्य की उचित परिभाषा हो। स्त्री का आंतरिक प्रतिबिम्ब पुरुष  स्त्री का पूरक भी पुरुष  मानो लहरों में बादलों का दर्पण वृक्षों की टहनियों समान सागर में नदियों का समर्पण। जैसे फूल को चूमती हवा  रोगी काया की सर्वोत्तम दवा। प्रेम की नौका का जल एवं स्त्री की हर दुविधा का हल। वह पुरुष है। उसका प्रेम कोमल जैसे आँचल में गिरता हुआ पंख दुर्लभ जैसे समुद्र में पाया गया हो शंख। शीतल जैसे पैरों को छूती गीली घास मासूम जैसे प्रत्येक स्त्री की आस। अरे! पुरुष का प्रेम तो असंतोष में स्थिरता दे जाता है जब कष्ट में वो तुम्हें माँ बनकर सहलाता है| दो प्रशंसा भरे शब्द सुन मन ही मन यूँ इठलाता ...

To my dear

To my dear once-loved, You are flourishing, it's true. I told you how quickly you'd move on, How joy would find you with each new dawn. It was my wish, and it had to come true, To see you happy, as I always knew. Your life now flows, so light, so free, A painless path, as it was meant to be. You promised to stand by me, through thick and thin, A steady hand, no matter where I'd been. But you cut me off, like I was just one more, A fleeting thought, erased and ignored. You never loved me, just played the role, Pretending well before them all. But I couldn't fulfill my dream— you , For you never wished for me, too. :) To my dear once-loved, You are flourishing, it's true. ***** -dp :)

वो प्रेम ढूँढ रही हूँ

  ऐसे दिन बिताने की वजह क्या जो दिन कब बीते पता क्या तुमसे पहले क्या और बाद क्या  मैंने रचा क्या और मेरे पास बचा क्या? कुछ भी तो नहीं. . . . एक शांत जगह खोज कर  आपकी मूक तस्वीरें देख रही हूँ  ठहरी हवा में भी शोर सी मन ही मन चीख रही हूँ  मैं आज भी आपका इंतज़ार कर रही हूँ  सूक्ष्म हवाएँ कैसी हैं? उस जगह की आहटों तक पहुँचना कैसा है? बादलों को चीरती हुई आज भी  यही अनुमान लगा रही हूँ  माँ, आपका इंतज़ार कर रही हूँ  इन फूल-पत्तों और बूँदों में शायद  जो आपसे मिलता आया- वो प्रेम ढूँढ रही हूँ आप के बाद जिस जीवन का आधार कल्पना से परे था  वो जिंदगी भी जी रही हूँ  मैं आज भी माँ आपका इंतज़ार कर रही हूँ  रंगो से आपको ही लिखा  उस लेख में आपको ही माँगा  शब्दों के मध्य  आपके व्यक्तित्व का कोष बुन रही हूँ  मैं आपका इंतज़ार आज भी कर रही हूँ । ****** - दीर्घा :) (in the memory of my beloved mother)