🌼🌼🌼
तुम इतने ज़ख्म खाए हुए हो,
रोते हुए को हँसाए हुए हो।
ज़रा पूछो एक सवाल खुद से भी कभी,
तुम क्यों ढोंग रच कर उन्हें लुभाए हुए हो?
उनको खुशी है तुम्हारे खिलखिलाने से,
तुम क्यों अपनी पीड़ा उनको दिखाए हुए हो?
केवल नज़दीकियाँ ही वो तुमसे चाहते हैं,
तुम क्यों अपने असंतुलित मन के लिए उन्हें सताए हुए हो?
राह में चलते वक्त इतने मशगूल रहे हो,
बहे न पानी न हवा जिस डगर, तुम उनकी ओर उधर भी बहे हो।
स्वीकार तुम्हें उनकी उपस्थिति मात्र थी,
फिर तुम क्यों हर पहर खुद को उनमें लुटाए हुए हो?
रो-रो कर सुजा लिए हैं नयन तुमने,
तुम उनके लिए आँखों में काजल सजाए हुए हो।
होठों के बीच से झांकती मुस्कुराहट से,
तुम लगी हुई बात दबाए हुए हो।
तुम जानते नहीं हो क्या कि आंकलन प्रेम का सतयुग से होता आया है?
तो तुम क्यों अंध भाव से लगन लगाए हुए हो?
ज़रा पूछो एक सवाल खुद से भी कभी,
तुम क्यों ढोंग रच कर उन्हें लुभाए हुए हो?
रोते हुए को हँसाए हुए हो।
ज़रा पूछो एक सवाल खुद से भी कभी,
तुम क्यों ढोंग रच कर उन्हें लुभाए हुए हो?
उनको खुशी है तुम्हारे खिलखिलाने से,
तुम क्यों अपनी पीड़ा उनको दिखाए हुए हो?
केवल नज़दीकियाँ ही वो तुमसे चाहते हैं,
तुम क्यों अपने असंतुलित मन के लिए उन्हें सताए हुए हो?
राह में चलते वक्त इतने मशगूल रहे हो,
बहे न पानी न हवा जिस डगर, तुम उनकी ओर उधर भी बहे हो।
स्वीकार तुम्हें उनकी उपस्थिति मात्र थी,
फिर तुम क्यों हर पहर खुद को उनमें लुटाए हुए हो?
रो-रो कर सुजा लिए हैं नयन तुमने,
तुम उनके लिए आँखों में काजल सजाए हुए हो।
होठों के बीच से झांकती मुस्कुराहट से,
तुम लगी हुई बात दबाए हुए हो।
तुम जानते नहीं हो क्या कि आंकलन प्रेम का सतयुग से होता आया है?
तो तुम क्यों अंध भाव से लगन लगाए हुए हो?
ज़रा पूछो एक सवाल खुद से भी कभी,
तुम क्यों ढोंग रच कर उन्हें लुभाए हुए हो?
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-Dirgha Pandey :)
Pandey ji chha gaye
ReplyDeleteउनको खुशी है हमारे खिलखिलाने से, इसी लिए ढोंग रच कर उन्हें लुभाए हुए है। Haha!😆😆
ReplyDeleteAnyway, as always, very nice writing! DP👌😊
Thankyou Nitin :)
Deleteवर्तमान परिस्थितियों के मनोभाव को दर्शाता आपका यह लेख बहुत ही सुन्दर है। अपने लेखन को जारी रखें 😊
ReplyDeleteThanks a lot Shubh :)
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