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अब वो बात नहीं....


"Yeh duniya nahi hai mere pas to kya...
Mera ye bhram tha mere pas tum ho..."


सुनो
,

मैं एक लहजा थी उसके तेवर में 

आज वो मुझे शब्द मात्र कहता है 

मैं तो उसके चलचित्र का हिस्सा थी 

वो मुझमें महज़ पात्र देखता है।

 

नजरें जिसकी मुझपर आकर ठहरती थी,

आज उसे मैं दर्शन मात्र दिखती हूँ 

मुझसे होता था दिन शुरु जिसका,

आज मैं उससे सायंकाल में भी कहाँ मिलती हूँ।

 

मुझे जान और ज़िंदगी बोला उसने 

किताबी और अकल्पनीय था पर 

मान लिया मैंने

स्थान मेरा सदैव मुझे दिखाया गया

फिर भी हर सत्य से मुँह मोड़ा मैंने।

 

इतनी यादें बनाई हमने

उसने एक झटके में सब मिटा दिया 

लोग कहते हैं कि मेरे लिये बहुत कुछ किया है उसने 

क्या हुआ जब वास्तव में ठहरने का समय आगया?

 

उसे प्रेम हुआ एक निडरप्रेरणात्मक और उदारवादी नारी से 

जिस पल वो टूट गईवो प्रेम कहीं छूट गया 

यह कैसा लगाव है यह कैसा बदलाव है

उन्नती में समक्ष और अवनति में ओझल सा?

 

अरे! मैं तो नूर थी उसके चेहरे का 

फ़िर आँखों में वो अब गुरूर नहीं 

क्या दिन ढले क्या समाँ बंधे 

मैं उसकी नज़र में अब हूर नहीं।

 

उसे कमियाँ खटकने लागी हैंबस उसने कहा नहीं 

मैं उन कमियों को लिखूँगी नहीं 

क्यूंकि 

वो ज़रिया हैं मुझे मन ही मन टटोलने का 

मैं बस चित्त में उन्हें समेटकर पढ़ती रहूँगी कहीं।

 

मुझे ज़रूरत कहा करता था अपनी,

मेरी कठिन परिस्थितियों का उपहास बना गया 

अब ना मैं बची ना उसमें आस्था

मेरे धैर्य का शिखर निकट आगया।

 

किसी के मिल जाने की उम्मीद में स्नेह करना मोहब्बत थोड़ी है 

कठिनाइयों के बहाने से त्याग देना मोह थोड़ी है 

जिसे स्पर्श समझा वो परछाई ही तो है

इतने वर्षों का साथएक मिथ्या ही तो है। 

 

मैं चांद थी उसका,

गालों की लालिमा भी थी

वह ऊब गया मुझसे, अब उसे मेरी चाहत नहीं

मैं अब उसका जुनून नहींउसे अब मेरी आदत नहीं।

 

मेरे दिन की घड़ियाँ अब भी अटकती नहीं हैं 

लेकिन अब वो हर घड़ी पास नहीं 

एक एहसास ज़रूर था उसका,

ख़ैर छोड़ो,

अब वो बात नहीं।

 

अब वो बात नहीं....

 

************

दीर्घा पांडेय :)

 

Comments

  1. ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

    ReplyDelete
  2. ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

    ReplyDelete
  3. ख़ैर छोड़ो,
    अब वो बात नहीं।❤️

    ReplyDelete
  4. बेहद सुंदर लिखा है....वाह...

    ReplyDelete

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