ऐसे दिन बिताने की वजह क्या
जो दिन कब बीते पता क्या
तुमसे पहले क्या और बाद क्या
मैंने रचा क्या और मेरे पास बचा क्या?
कुछ भी तो नहीं. . . .
एक शांत जगह खोज कर
आपकी मूक तस्वीरें देख रही हूँ
ठहरी हवा में भी शोर सी मन ही मन चीख रही हूँ
मैं आज भी आपका इंतज़ार कर रही हूँ
सूक्ष्म हवाएँ कैसी हैं?
उस जगह की आहटों तक पहुँचना कैसा है?
बादलों को चीरती हुई आज भी
यही अनुमान लगा रही हूँ
माँ, आपका इंतज़ार कर रही हूँ
इन फूल-पत्तों और बूँदों में शायद
जो आपसे मिलता आया- वो प्रेम ढूँढ रही हूँ
आप के बाद जिस जीवन का आधार कल्पना से परे था
वो जिंदगी भी जी रही हूँ
मैं आज भी माँ आपका इंतज़ार कर रही हूँ
रंगो से आपको ही लिखा
उस लेख में आपको ही माँगा
शब्दों के मध्य
आपके व्यक्तित्व का कोष बुन रही हूँ
मैं आपका इंतज़ार आज भी कर रही हूँ ।
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- दीर्घा :)
(in the memory of my beloved mother)
Lovely! Aunty is watching you from heaven and is super proud of you 💓
ReplyDeleteThank you 😊
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